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| बुढ़ापे में अकेले रहकर खुश रहना आसान नहीं होता, है ना loneliness-in-older-adults-ideas-for-coping-with-loneliness |
उम्र बढ़ने के साथ जीवन की रफ्तार भले धीमी हो जाए, लेकिन मन को साथ, संवाद और अपनापन हमेशा चाहिए। सेवानिवृत्ति, बच्चों का दूसरे शहरों में बस जाना, जीवनसाथी से दूरी या मित्रों का कम मिलना कई वरिष्ठ नागरिकों को अकेलेपन की ओर ले जा सकता है। अकेलापन केवल अकेले रहने का नाम नहीं है; भीड़ के बीच भी व्यक्ति खुद को अलग-थलग महसूस कर सकता है। इससे बचने के लिए जीवन में कुछ छोटे, लेकिन नियमित बदलाव किए जा सकते हैं।
सबसे पहले स्वय के प्रति दयालू बने। मन में आने वाली नकरात्मत बातों को पहचानें और उन्हें सकारात्मक सोच से बदलने का प्रयास करें। अपनी उपलब्धियों को याद करें।
वर्तमान क्षण में जीना सीखें। जब कोई अच्छी बात हो या कोई दिलचस्प अनुभव मिले, तो उसे किसी अपने से सांझा करें। किसी मित्र को फोन करें, पड़ोसी से बात करें या परिवार के सदस्य से आमने-सामने संवाद करें। बातचीत मन को हल्का करती है और रिश्तों में गर्माहट बढ़ाती है।
लोगों से वास्तविक संपर्क बनाए रखना जरूरी है। मिलते समय सामने वाले की बात ध्यान से सुनें।
चायं पर मित्र से मिलना, पड़ोसी के साथ टहलना या परिवार के साथ भोजन करना जैसी छोटी गतिविधियां भी अपनापन बढ़ाती हैं।
खाली समय का उपयोग सोच-समझकर करें। अकेलेपन में व्यक्ति अक्सर कमरे में बंद रहना, घंटों मोबाइल देखना या लगातार टैलीविजन चलाए रखना पसंद करता है। इसलिए रोज कुछ समय घर से बाहर निकलने और लोगों के बीच रहने के लिए तय करें।
सामूहिक गतिविधियों में भाग लें। पार्क में सुबह की सैर, योग, पुस्तक चर्चा, सामाजिक कार्यक्रम, संगीत, कला या खेल से जुड़े समूह में शामिल हों। आमने-सामने मिलने-जुलने से मन प्रसन्न रहता है और जीवन में उद्देश्य का अनुभव होता है।
अजनबियों से सामान्य बातचीत करने में भी संकोच न करें। दुकान के कर्मचारी, पार्क में मिलने वाले व्यक्ति या पड़ोसी से मुस्कराकर नमस्ते करना, सामाजिक जुड़ाव की शुरुआत हो सकती है। छोटे संवाद भी मन को यह एहसास देते हैं कि हम समाज का हिस्सा हैं।
इंटरनैट का उपयोग केवल समय बिताने के लिए न करें। वीडियो कॉल के माध्यम से पुराने मित्रों और रिश्तेदारों से बात करें, ऑनलाइन समूहों में शामिल हों या अपनी रुचि के विषय पर दूसरों से संवाद करें।
अपने ध्यान को केवल अपनी परेशानियों पर केंद्रित न रखें। सोचें कि आप दूसरों के लिए क्या कर सकते हैं। किसी बच्चे को पढ़ाना, पड़ोसी की सहायता करना, जरूरतमंद की मदद करना आपको उपयोगी और जुड़ा हुआ महसूस करा सकता है।
अनुभवों पर समय और धन खर्च करना भी सार्थक है। परिवार या मित्रों के साथ छोटी यात्रा, पिकनिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम की योज़ना बनाएं। ऐसी सांझा स्मृतियां लंबे समय तक खुशी देती हैं।
अपने रिश्तों पर ध्यान दें। पुराने मित्र को फोन करें, रिश्तेदार से मिलने का दिन तग्न करें।
रोज एक छोटी दिनचर्या बनाना भी मददगार है। सुबह सैर, दोपहर में फोन पर बातचीत और शाम को पसंदीदा गतिविधि के लिए समय निकालें। नियमितता मन को स्थिर रखती है।



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