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| 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, घोड़े पर होगा प्रस्थान, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त |
11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, घोड़े पर होगा प्रस्थान, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर और प्रस्थान घोड़े पर माना जा रहा है। पहले दिन कलश स्थापना के लिए सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान के वाहन का विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्र किस दिन से शुरू हो रहे हैं, इसके आधार पर माता रानी के आगमन का वाहन निर्धारित होता है। देवी भागवत पुराण में नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के वाहन से जुड़ा एक श्लोक मिलता है :
शशि सूर्ये गजारूढ़ा, शनि भौमे तुरंगमे।
गुरौ शुक्रे च दोलायां, बुधे नौका प्रकीर्तिता ।
इसका अर्थ है कि यदि नवरात्र की शुरुआत रविवार या सोमवार से होती है तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। शनिवार या मंगलवार से नवरात्र शुरू होने पर उनका वाहन घोड़ा माना जाता है। गुरुवार या शुक्रवार से नवरात्र शुरू हो तो माता डोली पर आती हैं, जबकि बुधवार से नवरात्र शुरू होने पर नाव को उनका वाहन माना जाता है।
इस बार शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्तूबर, रविवार से हो रही है इसलिए मां दुर्गा का वाहन हाथी होगा। मान्यता है कि हाथी पर माता का आगमन शुभफल देने वाला होता है। इससे कृषि उपज में वृद्धि तथा सुख-समृद्धि और धन-धान्य बढ़ने की संभावना मानी जाती है। इस लिहाज से मां दुर्गा का हाथी पर आगमन देश के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।
हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनके फल को आस्था के दृष्टिकोण से ही देखा जाना चाहिए।
इस बार 20 अक्तूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी और यह दिन मंगलवार है। धार्मिक मान्यता के अनुसार विजयादशमी के दिन के आधार पर मां दुर्गा के प्रस्थान का वाहन निर्धारित होता है।
बुधवार या शुक्रवार को विजयादशमी पड़े तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं।
गुरुवार को विजयादशमी होने पर माता का वाहन पालकी माना जाता है। रविवार या सोमवार को विजयादशमी पड़ने पर भैंसे को वाहन माना जाता है। शनिवार या मंगलवार को विजयादशमी होने पर माता के प्रस्थान का वाहन घोड़ा माना जाता है।
शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। इस दिन से नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना होगी। इसके साथ ही माता की आराधना शुरू हो जाएगी। इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार से हो रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रविवार और सोमवार को नवरात्रि शुरू होने पर मां दुर्गा का वाहन हाथी माना जाता है। इसलिए इस बार माता रानी हाथी पर सवार होकर आएंगी। वहीं नवरात्रि का समापन मंगलवार को होगा, इसलिए माता का प्रस्थान घोड़े पर माना जाएगा।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक का समय शुभ माना जा रहा है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा। शहर के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
कलश स्थापना कैसे करें?
नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान करके पूजा स्थल की सफाई करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। कलश में साफ पानी भरें और इसमें अक्षत, सुपारी और सिक्का डालें। कलश के ऊपर आम या अशोक के पत्ते रखें। इसके बाद नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित करें। कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा का ध्यान करें और विधि-विधान से पूजा शुरू करें।
मां दुर्गा की पूजा विधि
सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। इसके बाद कलश और मां दुर्गा की पूजा करें। माता को लाल फूल, चुनरी, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें। धूप और दीप जलाएं। इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या माता के मंत्रों का पाठ करें। अंत में मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
माता को क्या भोग लगाएं?
नवरात्रि में मां दुर्गा को फल, मिठाई, नारियल और सात्विक भोजन का भोग लगाया जाता है। अपनी श्रद्धा के अनुसार माता को भोग अर्पित कर सकते हैं। नौ दिनों में माता के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।
मां दुर्गा की सवारी का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि में माता के आगमन और प्रस्थान के वाहन का खास महत्व होता है। इस बार माता का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। हाथी को सुख-समृद्धि, धन-धान्य और अच्छी वर्षा से जोड़कर देखा जाता है। वहीं माता का प्रस्थान घोड़े पर होगा। धार्मिक मान्यताओं में देवी के घोड़े पर प्रस्थान को बदलाव और हलचल से जोड़कर देखा जाता है।
नवरात्रि में रखें इन बातों का ध्यान
नवरात्रि के दौरान घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई रखें। व्रत रखने वाले लोग अपनी क्षमता के अनुसार उपवास करें। सात्विक भोजन करें और पूजा-पाठ में मन लगाएं। अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन की भी परंपरा है। कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें उपहार या दक्षिणा दी जाती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।



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