
बच्चों के विकास के लिए सॉलिड फूड बहुत जरूरी होता है। ऐसे में उन्हें कब, क्या खिलाना है, इसकी पूरी जानकारी हम इस आलेख में पेश कर रहे हैं।
संकेतों का इंतजार करें: आमतौर पर बच्चे तीसरे से चौथे महीने में खाने के लिए तैयार होने के संकेत । देने लगते हैं। इस प्रक्रिया में वजन का बढ़ना, आपकी सहायता के बिना बैठना और आपके खाने की ओर आंखों से देखना शामिल हो सकता है। उत्सुक
खाने से कैसे कराएं परिचय : शुरुआती कुछ बार के लिए एक चम्मच या दो चम्मच अनाज दिन में दो बार काफी है। एक या दो महीने बाद खाने का गाढ़ा घोल दिया जा सकता है। नर्म-मुलायम प्लास्टिक स्पून या शुद्ध धातु से बने चम्मच से खिलाएं। स्तनपान या बेबी फॉर्मूला अब भी जारी रखें। याद रखें कि सॉलिड फूड केवल अतिरिक्त पोषण के लिए है, न कि स्तनपान या बेबी फॉर्मूला की जगह लेने के लिए।
क्या खिलाएं : आपका बच्चा किसी नए फूड से एलर्जिक तो नहीं, यह जांचने के लिए दो से तीन दिन तक लगातार एक ही नया फूड खिलाएं। हो सकता है कि आप अपने बच्चे को नई-नई चीजें खिलाने के लिए उत्सुक हो, लेकिन अपने उत्साह पर थोड़ा काबू रखें और एक समय में एक ही फूड ट्राइ करें। बच्चे को स्वाद और टैक्स्चर को अपनाने का वक्त दें। ती
क्या न खिलाएं : अतिरिक्त नमक या शक्कर, गाय का दूध, सिट्रस फूड, नट्स इत्यादि। हो सकता है इनमें से कुछ आपके बच्चे को सूट न करें या फिरं ये बच्चे की उम्र के लिहाज से बहुत सख्त हों और कुछ तो उनके मुंह में भी फंस सकते हैं।
कैसे समझें कि बच्चे का पेट भर गया है: पेट भरने का संकेत हर बच्चा अलग-अलग तरीके से देता है, अतः बच्चों द्वारा दिए जाने वाले छोटे-छोटे संकेतों को समझने की कोशिश करें। जैसे-खिलाते वक्त उनका मुंह हटाना या मुंह को बंद रखना या चम्मच को खिलौना बनाकर खेलना शुरू कर देना। बहुत संभव है कि पहला निवाला खाने के बाद ही बच्चे इनमें से कुछ चीजें करने लगें। उसकी मर्जी को समझें और जबरदस्ती न खिलाएं।


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