
भारत को त्यौहारों का देश कहा जाए तो यह गलत नहीं होगा। शारदीय नवरात्रों के साथ ही देश में त्यौहारों का सीजन शुरू हो जाता है। नवरात्रों के बाद दशहरा पर्व मनाया जाता है. तथा दशहरे के 20 दिन बाद दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है। इस तरह दीपावली के 6 दिन बाद सूर्य उपासना का पर्व, छठ पर्व, छइठ या षष्ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को आम तौर पर हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला एक पर्व है।
छठ पूजा में ठेकुआ, डाब नींबू, खरना भोग, चावल के लड्डू, केला, गन्ना, नारियल, सुथनी और सिंघाड़ा प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं। इस पर्व की सबसे अनूठी और महत्वपूर्ण रीत है डूबते हुए सूर्य और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देना। हिंदू धर्म में आमतौर पर उगते सूर्य को ही जल चढ़ाया जाता है, लेकिन छठ ही एकमात्र ऐसा पर्व है, जिसमें पहले (डूबते) सूर्य और फिर (उगते) सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। मान्यता है कि शाम के समय सूर्य देव अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ होते हैं, जो सूर्य की अंतिम किरण हैं। इसलिए इस अर्घ्य को प्रत्यूषा अर्घ्य भी कहा जाता है। डूबते सूर्य को अर्घ्य देना इस बात का प्रतीक है कि जीवन में हर उत्थान (उगने) के बाद पतन (डूबना) निश्चित है और हमें अपने जीवन के उतार-चढ़ावों को स्वीकार करना चाहिए। इस अर्घ्य से भक्तों के जीवन से अंधकार दूर होता है।
सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से भारत के बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाए जाने वाले इस महापर्व को इन क्षेत्रों के पंजाब, दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े महानगरों में रहने वाले लोगों द्वारा वहां भी इसे धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस बार छठ पूजा का पर्व 25 अक्तूबर दिन शनिवार से शुरू हो रहा है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से सप्तमी तिथि के सूर्योदय तक छठ पूजा का पर्व चलता है। जिस तरह से सैंकड़ों साल पहले, यह पर्व मनाया जाता था उसी तरह आज भी इसे मनाया जाता है।
छठ मैया की पूजा से संतान प्राप्ति, संतान की रक्षा और सुख-समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है। छठ मैया को सूर्य देव की बहन माना जाता है।
पूजा में किन-किन चीजों की होती है आवश्यकता
- अपने लिए नए वस्त्र ।
- छठ पूजा का प्रसाद रखने के लिए बांस की 2 बड़ी टोकरियां।
- बांस या पीतल के सूप।
- दूध तथा जल के लिए एक गिलास, एक लोटा तथा थाली।
- पानी वाला नारियल ।
- धूप, चावल, सिंदूर, दीपक ।
- हल्दी, मूली और अदरक का हरा पौधा।
- पत्तों सहित 5 गन्ने।
- मीठा नींबू बड़ा, शरीफा, केला और नाशपाती।
- शकरकंदी तथा सुथनी ।
- पान और साबुत सुपारी।
- शहद
- कुमकुम, चंदन, अगरबती या धूप तथा कपूर।
- मिठाई, गुड़, गेहूं और चावल का आटा।
पहला दिन : नहाय खाय
पहला दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को नहाय खाय के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष नहाय खाय 25 अक्तूबर दिन शनिवार को है। सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र किया जाता है।
इसके पश्चात छठ व्रती स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन को ग्रहण कर व्रत की शुरूआत करते हैं। घर के बाकी सदस्य व्रती के भोजन करने के उपरांत ही खाना खाते हैं। भोजन के रूप में कटू, चने की दाल व चावल ग्रहण किया जाता है।
दूसरा दिन : खरना व लोहंडा
दूसरे दिन कार्तिक मास के शुक्त पक्ष की पंचमी को व्रतधारी दिन भर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं जिसे खरना कहा जाता है। इस वर्ष खरना और लोहंडा 26 अक्तूबर को है।
खरना का प्रसाद लेने के लिए आस-पास के सभी लोगों को आमंत्रित किया जाता है। प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध चावल का पिट्टा और घी से चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। इसमें नमक या चीनी का उपयोग नहीं किया जाता।
तीसरा दिन : संध्या अर्घ्य
तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को दिन में छठ प्रसाद बनाया जाता है। इस पर्व के लिए जो प्रसाद होता है वह घर में ही तैयार किया जाता है। ठेकुआ और कसार के अलावा अन्य जो भी पकवान बनाए जाते हैं वे खुद व्रत करने वाले या उनके परिजन घरों में ही तैयार करते हैं। ठेकुआ गुड़ और आटे से तैयार किया जाता है, वहीं कसार चावल के आटे व गुड़ से तैयार किया जाता है।
छठ के लिए इस्तेमाल होने वाले बर्तन या तो बांस के बने होते हैं या फिर मिट्टी के। शाम को पूरी तैयारी के साथ बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है। व्रती के साथ परिवार के सारे लोग सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाट की ओर चले जाते हैं। सभी छठ व्रती एक निश्चित तालाब या नदी के किनारे इकट्ठे होकर सामूहिक रूप से अर्घ्य दान करते हैं। सूर्य को जल और दूध का अर्घ्य दिया जाता है तथा छठ मैया की प्रसाद से भरे सूप से पूजा की जाती है। इस वर्ष डूबते सूर्य को दिया जाने वाला संध्या अर्घ्य 27 अक्तूबर सोमवार को है।
चौथा दिन : सुबह का अर्घ्य
चौथे दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी की सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। व्रती उसी स्थान पर पुनः इकट्ठे होते हैं जहां उन्होंने शाम को अर्घ्य दिया होता है। सभी व्रती सुबह तड़कसार उठकर पूजा की सारी सामग्री सूप में सजाकर घाट पर जाने के लिए चल पड़ते हैं और पानी में खड़े होकर सूर्य के उदय होने का पूरी श्रद्धा से इंतजार करते हैं।
जैसे ही सूर्य उदय होता है तो सभी श्रद्धालु छठ मैया के जयकारे लगाकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। अंत में व्रती कच्चे दूध का शर्बत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूरा करते हैं। इस बार सुबह का अर्घ्य और पारण 28 अक्तूबर मंगलवार को है।
जानें आंवला नवमी व्रत के फायदे
🌞 छठी मैया से जुड़े लोकप्रिय Google FAQs (हिंदी में)
❓ छठी मैया कौन हैं?
उत्तर: छठी मैया सूर्य देव की बहन और संतान सुख देने वाली देवी मानी जाती हैं। इन्हें ऊषा या षष्ठी देवी के रूप में पूजा जाता है। छठ पूजा के समय इन्हें विशेष रूप से प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा जाता है।
❓ छठी मैया की पूजा कब और कैसे की जाती है?
उत्तर: छठी मैया की पूजा साल में दो बार की जाती है — छठ पर्व के रूप में चैत्र (चैती छठ) और कार्तिक (कार्तिकी छठ) महीनों में। पूजा में व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं, नदी या तालाब के किनारे सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मैया की आराधना करते हैं।
❓ छठी मैया की कथा क्या है?
उत्तर: पौराणिक कथा के अनुसार, जब राजा प्रियव्रत को संतान नहीं हुई, तब उन्होंने छठी मैया की उपासना की। देवी ने प्रसन्न होकर उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। तभी से छठी मैया की पूजा संतान सुख और परिवार की समृद्धि के लिए की जाने लगी।
❓ छठी मैया को प्रसन्न करने के लिए क्या चढ़ाते हैं?
उत्तर: छठी मैया को ठेकुआ, फल (केला, नारियल, गन्ना, सेब), दूध, और अरघ (सूर्य को अर्पण किया जाने वाला जल) चढ़ाया जाता है। सभी प्रसाद बिना नमक और बिना लहसुन-प्याज के बनाए जाते हैं।
❓ छठी मैया की पूजा में कौन-कौन से नियम माने जाते हैं?
उत्तर: व्रत के दौरान सात्विकता, शुद्धता और संयम का पालन किया जाता है। व्रती नई कपड़े पहनते हैं, किसी से झगड़ा नहीं करते, और पूरे व्रत काल में आत्मसंयम बनाए रखते हैं। छठी मैया की पूजा में साफ-सफाई का बहुत महत्व है।
❓ छठी मैया का असली नाम क्या है?
उत्तर: छठी मैया को देवी षष्ठी कहा जाता है, जो कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पूजी जाती हैं। इन्हें संतान प्रदायिनी देवी और सूर्य देव की बहन ऊषा भी कहा जाता है।
❓ छठी मैया की आरती कौन-सी गाई जाती है?
उत्तर: सबसे लोकप्रिय आरती है —
“जय-जय छठी मइया, जय उगह सुरज देव”।
इसके अलावा “केलवा जे फरेला घवद से ओ पिया” और “उग हे सूरज देव” जैसे पारंपरिक गीत भी छठ पूजा में गाए जाते हैं।
❓ छठी मैया की पूजा का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
उत्तर: छठ पूजा के दौरान सूर्य की किरणों से शरीर को ऊर्जा मिलती है और जल में खड़े होकर अर्घ्य देने से मानसिक शांति व शरीर का संतुलन बना रहता है। यह पर्व पर्यावरण और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक भी है।
❓ छठी मैया की पूजा के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?
उत्तर: पूजा के दौरान मांसाहार, मद्यपान, झूठ, अपशब्द, और किसी के प्रति दुर्भावना से बचना चाहिए। व्रती को पूजा स्थल की पवित्रता बनाए रखनी होती है।
❓ छठी मैया की कृपा से क्या लाभ होते हैं?
उत्तर: छठी मैया की कृपा से संतान सुख, परिवार में समृद्धि, रोगों से मुक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है। माना जाता है कि सच्चे मन से व्रत करने पर हर मनोकामना पूरी होती है।


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