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| बच्चे अलग सोएं या माता-पिता के साथ? |
बच्चों को अपने साथ सुलाना चाहिए या अलग, यह सवाल आज के छोटे और सीमित जगह वाले परिवारों में अवसर सामने आता है। विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि बच्चे को उम्र के अनुसार धीरे धीरे अलग सोने की आदत डालनी चाहिए। इससे बच्चे में आत्मनिर्भरता आती है और माता पिता को भी पर्याप्त आराम मिल पाता है।
नवजात को चाहिए मां की नजदीकी
नवजात शिशु को तुरंत अलग कमरे में सुलाना उचित नहीं है। शुरूआती महीनों में बच्चे को बार-बार दूध की जरूरत पड़ती है और वह रात में कई बार जाग सकता है। मां के पास होने से उसकी जरूरतों को समझना और उसे संभालना आसान होता है। हालांकि, बच्चे की सुरक्षित नींद के लिए उसके सोने की अलग. और सुरक्षित जगह रखना अधिक उचित है।
धीरे धीरे डालें अलग सोने की आदत
बच्चा थोड़ा बड़ा होने लगे तो उसे अपने बिस्तर पर सुलाने की आदत डालनी चाहिए। शुरूआत में उसका बिस्तर माता-पिता के विस्तर के पास रखा जा सकता है। इससे बच्चा सुरक्षित महसूस करेगा और धीरे-धीरे अकेले सोना सीख जाएगा।
कई माता-पिता बच्चों को 7-8 साल या उससे भी अधिक उम्र तक अपने साथ सुलाते हैं। इससे उनमें अकेले सोने को लेकर झिझक या निर्भरता बनी रह सकती है। उम्र बढ़ने के साथ बच्चे को अपनी निजी जगह और स्वतंत्रता देना जरूरी है। लगभग 8-9 वर्ष की उम्र में, परिस्थितियों के अनुसार, उसे अलग कमरे में सुलाने की आदत भी डाली जा सकती है। बच्चों का कमरा माता पिता के कमरे के पास हो तो उन्हें सुरक्षा 'का अहसास बना रहता है।
बच्चे का कमरा बनाएं आकर्षक
बच्चों के कमरे में उनकी पढ़ाई की मेज-कुर्सी, किताबें और पसंद की चीजें रखें। हल्की रोशनी की व्यवस्था भी की जा सकती है, ताकि रात में उन्हें डेर न लगे। उन्हें समझाएं कि यह उनका अपना कमरा है, जहां वे पढ़ सकते हैं, खेल सकते हैं और आराम से सो सकते हैं। परिवार के पास केवल एक कमरा है तो कमरे को पर्दे या अन्य तरीके से दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। एक हिस्से में माता-पिता और दूसरे में बच्चों के सोने की व्यवस्था की जा सकती है। इससे सीमित, जगह में भी बच्चों को निजी स्थान मिल कता है।
पति-पत्नी के रिश्ते के लिए भी जरूरी
बच्चों का धीरे-धीरे अलग सोना केवल उनकी आदत और आत्मनिर्भरता के लिए ही नहीं, बल्कि माता-पिता के रिश्ते के लिए भी महत्वपूर्ण है।
पति-पत्नी को एक-दूसरे के साथ समय बिताने और अपने रिश्ते को मजबूत बनाए रखने के लिए निजी समय और स्थान की जरूरत होती है इसलिए बच्चों को उम्र और परिस्थितियों के अनुसार धीरे-धीरे अलग सोने की आदत डालना बेहतर है।



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