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बच्चों को प्यार देना जरूरी है, लेकिन उनकी हर जिद पूरी करना सही नहीं। जरूरत से ज्यादा लाड़ * प्यार और छूट उन्हें जिद्दी व स्वार्थी बना सकती है। प्यार के साथ अनुशासन और सीमाएं तय करना बेहतर परवरिश की कुंजी है।
हर मांग तुरंत पूरी न करें
बच्चा किसी चीज की मांग करे तो केवल उसे खुश करने के लिए तुरंत खरीदारी न करें। पहले देखें कि वह चीज उसके लिए जरूरी है या सिर्फ दूसरों की देखा-देखी वह उसे मांग रहा है। उसे समझाएं कि हर, पसंद की चीज तुरंत मिलना जरूरी नहीं। इससे उसमें जरूरत और इच्छा के बीच अंतर समझने की क्षमता विकसित होगी।
इंतजार करना सिखाएं
बच्चे को छोटी-छोटी चीजों के लिए इंतजार करना सिखाएं। उसकी हर जरूरत तुरंत पूरी करने के बजाय "उसे थोड़ा समय दें। यदि वह किसी चीज के लिए उत्सुक है, तो उसका ध्यान किसी दूसरे काम में लगा सकते हैं। इंतजार करने की आदत बच्चे में धैर्य और सहनशीलता विकसित करती है।
रोने पर तुरंत न झुकें
अगर बच्चा दर्द, डर या किसी वास्तविक परेशानी के कारण रो रहा है, तो उसकी मदद करें और उसकी बात समझें। लेकिन केवल जिद पूरी कराने के लिए रोने पर तुरंत उसकी मांग न मानें। शांत होने के बाद उसे प्यार से समझाएं कि रोकर या चिल्लाकर अपनी बात मनवाना सही तरीका नहीं है।
घर में स्पष्ट सीमाएं तय करें
बच्चे को शुरू से ही बताएं कि क्या सही है और क्या गलत। जैसे किसी को मारना नहीं, बड़ों का सम्मान करना, अपनी चीजें संभालकर रखना, बिना बताए किसी की चीज न लेना और समय पर होमवर्क करना। नियम कम हों, लेकिन स्पष्ट हों। बच्चे को यह भी पता होना चाहिए कि नियम तोड़ने पर क्या परिणाम होगा।
अपनी बात पर कायम रहें
एक बार कोई नियम तय करने के बाद केवल बच्चे के रोने या जिद करने पर उसे बदल न दें। यदि माता-पिता बार-बार अपना निर्णय बदलते हैं, तो बच्चा समझ जाता है कि जिद करने से उसकी बात मनवाई 'जा सकती है। दृढ़ रहें, लेकिन कठोर नहीं। बच्चे को गलती समझाने के लिए शांत भाषा का इस्तेमाल करें।
बच्चों की बात जरूर सुनें
बच्चे की हर बात को तुरंत खारिज न करें। काम की व्यस्तता के बावजूद रोज थोड़ा समय उसके लिए जरूर निकालें। उसकी बातें ध्यान से सुनें, सवालों के जवाब प्यार से दें और उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। जब बच्चा महसूस करेगा कि उसकी बात सुनी जा रही है, तो वह अपनी बात मनवाने के लिए जिद या रोने का सहारा कम लेगा।



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