
धर्मशास्त्रों में पितरों की तृति के लिए ब्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और ब्राहाण भोजन का विधान बताया गया है लेकिन हर व्यक्ति के लिए विस्तृत कर्मकांड करना संभव नहीं होता। किसी के पास पर्याप्त धन नहीं होता, किसी को विधि की जानकारी नहीं होती और कोई समय या | स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण ब्राद्ध नहीं कर पाता। ऐसे में चार सरल उपाय बताए गए हैं।
1. यथाशक्ति भोजन अथवा सामग्री का दान यदि आय सामान्य है तो
पितरों की स्मृति में किर्सी योग्य ब्राह्मण अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं। पूरा भोजन कराना संभव न हो तो आरा, चावल, दाल, फल, गुड़ शकर, सब्जी या अन्य भोजन सामग्री के साथ यथाशक्ति दक्षिणा दी जा सकती है।
2. काले तिल से तर्पण
आर्थिक स्थिति बहुत कमजो कमजोर हो तो स्वच्छ जल में काले तिल डालकर पितरों का तर्पण करें। किसी पवित्र जलाशय, नदी तट या घर में स्वच्छ स्थान पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूर्वजों को जल अर्पित किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता में काले तिल को पितृकर्म के लिए विशेष पवित्र माना गया है।
3. गाय को चारा खिलाएं
यदि तर्पण और दान करना भी संभव न हो तो पितरों का स्मरण करके गाय को हरा चारा, रोटो अथवा सात्विक भोजन खिलाएं। भोजन साफ और पशु के स्वास्थ्य के अनुकूल होना चाहिए। प्लास्टिक को थैली में भोजन न दें। गौसेवा को पितरों की प्रसन्नता और समस्त देवताओं की आराधना से जोड़कर देखा गया है।
5. सूर्यदेव से करें प्रार्थना
यदि उपरोक्त कोई भी उपाय संभव न हो तो खुले स्थान पर खड़े होकर सूर्यदेव को प्रणाम करें। हाथ जोड़कर मन में कहें। हे सूर्यदेव ! धन और साधनों के अभाव में मैं विधिपूर्वक अपने पितरों का श्राद्ध नहीं कर पा रहा हूं। कृपया मेरी श्रद्धा, प्रेम और प्रणाम मेरे पूर्वजों तक पहुंचाएं तथा उन्हें तृप्त करें।
इन उपायों का आधार खर्च नहीं, बल्कि श्रद्धा है लेकिन सक्षम होते हुए केवल आलस्य, लालच वा जिम्मेदारी से बचने के लिए सरल विकल्प चुनना उचित नहीं माना गया है।
पूर्वजों के प्रति वास्तविक बंद्धा का सबसे बड़ा रूप है माता-पिता की सेवा, परिवार में सद्भाव जरूरतमंदों की सहायता और पूर्वजों के अच्छे संस्कारों का पालन।
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