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| बच्चों को कम 'मीठा' देने के हैं फायदे अनेक |
बच्चों को जरूरत से ज्यादा मीठा खिलाना उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। नई स्टडी में पाया गया है कि जिन लोगों ने जीवन के शुरुआती वर्षों में कम चीनी का सेवन किया, उनमें आगे चलकर कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम कम देखा गया। शोध में जन्म से लेकर शुरुआती 1,000 दिनों (2 साल 9 महीने) के खानपान को खास तौर पर महत्वपूर्ण बताया गया है। यह रिसर्च 'नैशनल एकैडमी ऑफ साइंसेज' की पत्रिका में प्रकाशित हुई है।
कैसे हुई रिसर्च ?
अध्ययन में ब्रिटेन में 1951 से 1956 के बीच जन्मे 64,761 लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने उस समय लागू चीनी की राशनिंग व्यवस्था को एक प्राकृतिक प्रयोग के तौर पर देखा। सितंबर 1953 में राशनिंग खत्म होने से पहले पैदा हुए बच्चों के शुरुआती जीवन में चीनी की उपलब्धता कम थी, जबकि बाद में पैदा हुए बच्चों को इसकी अधिक उपलब्धता मिली। दोनों समूहों की तुलना में शुरुआती जीवन में कम चीनी की उपलब्धता वाले लोगों में कुछ कैंसर का जोखिम कम पाया गया।
किन कैंसर का जोखिम कम मिला ?
सबसे मजबूत संबंध लिवर और इंट्राहेपेटिक बाइल डक्ट कैंसर के साथ देखा गया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि चीनी सीधे तौर पर कैंसर का कारण है या कम चीनी खाने से कैंसर से बचाव की गारंटी मिलती है। कैंसर का जोखिम धूम्रपान, शराब, प्रदूषण, वजन, शारीरिक गतिविधि और आनुवंशिक कारणों समेत कई कारकों पर निर्भर करता है।
बचपन की आदतों का असर
अध्ययन में यह भी सामने आया कि जिन लोगों ने बचपन में कम 'चीनी खाई, उन्होंने बाद की जिंदगी में भी अपेक्षाकृत कम चीनी का सेवन किया। इससे संकेत मिलता है कि बचपन में बहुत मीठे स्वाद की आदत न पड़ने से आगे चलकर कम मीठा खाना सामान्य लग सकता है।
डॉक्टर की सलाह
दिल्ली एम्स के पीडियाट्रिक विभाग के डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, बच्चों के आहार में 'एडेड या फ्री शुगर' कम रखना फायदेमंद है। माता-पिता को खास तौर पर मिठाई, चॉकलेट, मीठे बिस्किट, केक और शुगर वाले पेय का सेवन सीमित रखना चाहिए। वहीं, फलों और दूध में प्राकृतिक रूप से मौजूद शुगर को अतिरिक्त चीनी के बराबर नहीं माना जाता।



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