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| वैवाहिक बंधन और प्रेम की प्रतीक 'हरियाली तीज |
हरियाली तीज का त्यौहार, जिसे श्रावणी तीज भी कहा जाता है, भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो वैवाहिक बंधन और प्रेम का प्रतीक है। यह त्यौहार महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर विवाहित महिलाओं के लिए, जो अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं।
पौराणिक मान्यताएं
पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, इससे प्रसन्न होकर शिव जी ने हरियाली तीज के दिन ही मां पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया था। अखंड सौभाग्य का प्रतीक यह त्यौहार भारतीय परंपरा में पति-पत्नी के प्रेम को और प्रगाढ़ बनाने तथा आपस में श्रद्धा और विश्वास कायम रखने का त्यौहार है, इसके आलावा यह पर्व पति-पत्नी को एक दूसरे के लिए त्याग करने का संदेश भी देता है। इस दिन कुंवारी कन्याएं व्रत रखकर अपने लिए शिव जैसे वर की कामना करती हैं, वहीं विवाहित महिलाएं अपने सुहाग को भगवान शिव तथा पार्वती से अक्षुण्ण बनाए रखने की कामना करती हैं।
स्त्री ऊर्जा का उत्सव
हरियाली तीज को खास बनाने वाला तत्व है कि यह महिलाओं को एक साथ लाता है। चाहे बहनें हों, सहेलियां हों, पड़ोसी हों या मां-बेटियां, यह त्यौहार हंसी, संगीत और स्नेह से भरपूर होता है। इस अवसर पर महिलाएं उपहार बांटने के लिए अपने मायके जाती हैं और लड्डू व घेवर जैसी मिठाइयों का आनंद लेती हैं। कई जगहों पर पेड़ों की शाखाओं पर झूले लटकाए जाते हैं और महिलाएं बारी-बारी से गीतों का आनंद लेते हुए रंग-बिरंगे परिधानों में सजी बादलों के बीच झूला झूलते हुए उत्सव मनाती हैं, जो इसका एक अद्भुत प्रतीक बन गया है।
तीज महिलाओं को अपने दैनिक दायित्वों से मुक्त होकर अपनी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़ने और हमारे वर्तमान भागदौड़ भरे समाज में एक-दूसरे के साथ मेलजोल बढ़ाने का अवसर देती है।
हरियाली तीज धार्मिक भक्ति को स्त्री शक्ति के गहन स्त्री स्वभाव के साथ-साथ दैनिक जीवन में धैर्य और शालीन आचरण के साथ जोड़ती है। महिलाएं अपनी सुंदरता के साथ-साथ अपनी भक्ति भी दिखाती हैं, साथ ही सोलह श्रृंगार और उपवास के माध्यम से अपनी आंतरिक शक्ति को व्यक्त करती हैं।
हरियाली तीज पूजा विधि
हरियाली तीज में हरी चूड़ियां, हरे वस्त्र पहनने, सोलह श्रृंगार करने और मेहंदी रचाने का विशेष महत्व है। इस त्यौहार पर विवाह के पश्चात पहला सावन आने पर नवविवाहित लड़कियों को ससुराल से पीहर बुला लिया जाता है। परंपरा के अनुसार नवविवाहिता के ससुराल से इस त्यौहार पर सिंजारा भेजा जाता है जिसमें वस्त्र, आभूषण, श्रृंगार का सामान, मेहंदी, घेवर-फैनी और मिठाई इत्यादि सामान होता है।
इस दिन महिलाएं मिट्टी या बालू से मां पार्वती और शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करती हैं। पूजन में सुहाग की सभी सामग्रियों को एकत्रित कर थाली में सजाकर माता पार्वती को चढ़ाना चाहिए। नैवेद्य में भगवान को खीर पूड़ी या हलवा और मालपुए से भोग लगाकर प्रसन्न करें। तत्पश्चात भगवान शिव को वस्त्र चढ़ाकर तीज माता की कथा सुननी या पढ़नी चाहिए। पूजा के बाद इन मूर्तियों को नदी या किसी पवित्र जलाशय में प्रवाहित कर दिया जाता है।
मान्यता है कि इस दिन जो सुहागन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करके भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं, उनको सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।



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