
नवजात शिशु का रोना हर माता-पिता के लिए चिंता का कारण बन जाता है, खासकर तब जब वजह समझ न आए। कई बार बच्चे का पेट गैस की वजह से फूल जाता है और वह असहज होकर रोने लगता है। यह समस्या इतनी आम है कि लगभग हर माता-पिता को इसका सामना करना पड़ता है।
छोटे बच्चों, खासकर नवजात शिशुओं में पेट में गैस और मरोड़ की समस्या बहुत सामान्य होती है। इसी कारण बच्चा अचानक रोने लगता है या शरीर को ऐंठने लगता है। मेडिकल भाषा में इसे इंफैंट कोलिक कहा जाता है।
क्यों होती है नवजात शिशुओं में गैस की समस्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के बाद शुरुआती हफ्तों में बच्चे का पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता। यही कारण है कि दूध पीने के दौरान या बाद में गैस बन जाती है और बच्चा असहज महसूस करता है।
जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसका शरीर नई-नई संवेदनाओं को समझने लगता है। गैस का मूवमेंट भी उसके लिए एक नया अनुभव होता है, जिसकी वजह से वह रोकर प्रतिक्रिया देता है।
किस उम्र में ज्यादा होती है यह समस्या?
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार:
- लगभग 15-20 दिन की उम्र से गैस की समस्या शुरू हो सकती है
- 45 दिनों के आसपास यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है
- 3 महीने की उम्र तक यह धीरे-धीरे कम होने लगती है
इस दौरान बच्चा अपने शरीर में हो रहे बदलावों को समझ नहीं पाता, इसलिए रोना ही उसका एकमात्र तरीका होता है अपनी परेशानी बताने का।
बच्चे में गैस के लक्षण
अगर आपके बच्चे को गैस की समस्या है, तो ये संकेत दिखाई दे सकते हैं:
- बार-बार रोना या चिड़चिड़ापन
- पेट का फूलना
- पैरों को पेट की तरफ मोड़ना
- दूध पीने के बाद बेचैनी
- गैस पास करते समय रोना
घरेलू उपाय जो बच्चे को देंगे राहत
1. पेट की हल्की मसाज करें
नाभि के आसपास हल्के हाथों से गोल-गोल घुमाते हुए मसाज करें।
यह गैस को बाहर निकालने में मदद करता है और बच्चे को आराम देता है।
👉 ध्यान रखें: मसाज बहुत हल्के हाथों से ही करें।
2. साइकिलिंग एक्सरसाइज
बच्चे को पीठ के बल लिटाकर उसके पैरों को साइकिल चलाने की तरह धीरे-धीरे घुमाएं।
यह तरीका बेहद कारगर है क्योंकि:
पेट की गैस आसानी से बाहर निकलती है
बच्चे को तुरंत राहत मिलती है
3. डकार (Burping) जरूर दिलाएं
हर बार दूध पिलाने के बाद बच्चे को कंधे पर लेकर हल्के से थपथपाएं ताकि डकार आ जाए।
इससे पेट में फंसी हवा बाहर निकल जाती है।
4. सही तरीके से दूध पिलाएं
बच्चे का मुंह सही तरीके से लगना चाहिए
हवा निगलने से बचाने के लिए पोजिशन सही रखें
5. मां के खान-पान का ध्यान रखें
अगर बच्चा स्तनपान करता है, तो मां को भी अपने खान-पान का ध्यान रखना चाहिए।
कुछ चीजें जैसे ज्यादा मसालेदार या गैस बनाने वाले खाद्य पदार्थ बच्चे को प्रभावित कर सकते हैं।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?
हालांकि गैस और कोलिक सामान्य समस्या है, लेकिन कुछ स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है:
बच्चा लगातार बहुत तेज रो रहा हो
दूध पीना बंद कर दे
पेट बहुत ज्यादा फूल गया हो
बुखार या उल्टी हो रही हो
बच्चा असामान्य रूप से सुस्त लग रहा हो
👉 बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार दवाइयां देना सही नहीं है।
माता-पिता के लिए जरूरी सलाह
नवजात शिशु की देखभाल में धैर्य सबसे जरूरी चीज है।
गैस की समस्या अस्थायी होती है और समय के साथ खुद ही ठीक हो जाती है।
- बच्चे को प्यार और आराम दें
- उसके संकेतों को समझने की कोशिश करें
- घबराने के बजाय सही जानकारी रखें
निष्कर्ष
बच्चों में गैस और पेट फूलने की समस्या आम है, लेकिन सही देखभाल और छोटे-छोटे घरेलू उपायों से इसे आसानी से संभाला जा सकता है।
याद रखें, हर बच्चा अलग होता है—इसलिए अगर आपको कुछ भी असामान्य लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे बेहतर विकल्प है।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. क्या नवजात में गैस होना सामान्य है?
हाँ, यह पूरी तरह सामान्य है क्योंकि उनका पाचन तंत्र विकसित हो रहा होता है।
Q2. बच्चे को गैस से तुरंत राहत कैसे दें?
हल्की मसाज, साइकिलिंग एक्सरसाइज और डकार दिलाना सबसे असरदार उपाय हैं।
Q3. गैस की समस्या कब तक रहती है?
आमतौर पर 3 महीने की उम्र तक यह समस्या कम हो जाती है।
Q4. क्या दवा देना जरूरी है?
नहीं, बिना डॉक्टर की सलाह के दवा देना सही नहीं है।


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