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| जानिए क्यों ? बुजुर्गों के लिए जरूरी है सही तरीके से चलना और गिरने से बचना |
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव आते हैं। मांसपेशियों की ताकत कम होने लगती है, घुटनों और कूल्हों के जोड़ों में दर्द रहने लगता है और शरीर का संतुलन भी पहले जैसा नहीं रहता। ऐसे में चलते-फिरते समय जय-सी लापरवाही भी गिरने और गंभीर चोट का कारण बन सकती है।
बुजुर्गों के लिए गिरना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई बार उनकी आत्मनिर्भरता और जीवनशैली को प्रभावित करने वाली घटना बन जाता है इसलिए उम्र के इस पड़ाव पर सक्रिय रहने के साथ-साथ सुरक्षित ढंग से चलना और गिरने से बचाव करना बेहद जरूरी है।
1. चलते समय रखें इन बातों का ध्यान
टहलना दिल, फेफड़ों और जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा व्यायाम है। इससे शरीर सक्रिय रहता है और मांसपेशियों को भी मजबूती मिलती है लेकिन सुरक्षित तरीके से चलना भी उतना ही जरूरी है।
2. पैर उठाकर चलें
चलते समय पैरों को घसीटने की आदत से बचें। इससे छोटी-सी बाधा या कालीन का किनारा भी ठोकर लगने 'का कारण बन सेकता है। कदम सोच-समझकर और संतुलित ढंग से रखें।
3. चलते समय ध्यान भटकने न दें
सड़क पर चलते हुए मोबाइल फोन - पर बात करना, संदेश पढ़ना या दोनों हाथों में भारी सामान उठाना खतरनाक हो सकता है। सीढ़ियां चढ़ते-उतरते समय भी पूरा ध्यान रखें।
4. सुरक्षित रास्ता चुनें
सुबह या शाम को पर्याप्त रोशनी में समतल और सांफ रास्ते पर टहलें। टूटी सड़क, बजरी, गीले फर्श और बारिश के दौरान फिसलन वाली जगहों से बचें।
वॉकिंग स्टिक कमजोरी नहीं, सहारा है
कई बुजुर्ग वॉकिंग स्टिक या छड़ी का इस्तेमाल करने से हिचकिचाते हैं। उन्हें लगता है कि इससे उनकी कमजोरी जाहिर होगी लेकिन छड़ी आत्मनिर्भरता बनाए रखने का एक उपयोगी साधन है। इससे शरीर को अतिरिक्त सहारा मिलता है और दर्द वाले घुटने या कूल्हे पर पड़ने वाला दबाव कम करने में मंदद मिलती है।
छड़ी की ऊंचाई ऐसी होनी चाहिए कि सीधे खड़े होने पर उसका हैंडल कलाई के मोड़ के बराबर रहे। यदि दाहिने घुटने या कूल्हे में दर्द है, तो छड़ी बाएं हाथ में और बाईं ओर दर्द होने पर दाएं हाथ में पकड़नी चाहिए। छड़ी के निचले हिस्से में लगी रबर की पकड़ को भी समय-समय पर जांचें और घिस जाने पर बदल दें।
घर को बनाएं गिरने से सुरक्षित
बुजुर्गों के साथ गिरने की कई घटनाएं घर के भीतर ही होती हैं। इसलिए घर की व्यवस्था में छोटे-छोटे बदलाव करके बड़ी दुर्घटनाओं, से बचा जा सकता है।
* बाथरूम और शौचालय में मजबूत 'ग्रैब बार' लगवाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें पकड़कर सहारा . लिया जा सके।
* बाथरूम में फिसलनरोधी मैट बिछाएं और नहाते समय जरूरत हो तो मजबूत स्टूल का इस्तेमाल करें।
* रास्ते में बिछे ढीले कालीन, छोटी मेजें और बिजली के तार हटा दें।
* बैडरूम से बाथरूम तक रात में हल्की रोशनी की व्यवस्था रखें।
* सुबह उठने या रात में बिस्तर से बाहर निकलने पर तुरंत खड़े न हों। पहले 30 से 60 सैकेंड तक बिस्तर के किनारे बैठें और फिर धीरे-धीरे उठें। इससे अचानक चक्कर आने और रक्तचाप गिरने की आशंका कम हो सकती है।



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