
शिशुओं की त्वचा बेहद नाजुक और संवेदनशील होती है। लंबे समय तक गीले या गंदे डायपर के संपर्क में रहने, डायपर के त्वचा से रगड़ खाने या नमी के कारण उनके नाजुक हिस्से में लालिमा और रैशेस हो सकते हैं। कई बार रैश के कारण बच्चा असहज और चिड़चिड़ा रहने लगता है। कुछ मामलों में यह समस्या फंगल या बैक्टीरियल इंफैक्शन का रूप भी ले सकत्ती है। इसलिए डायपर एरिया को साफ, सूखा और सुरक्षित रेखना बेहद जरूरी है।
अच्छी बात यह है कि आसान सावधानियां अपनाकर डायपर रैश की समस्या को रोका जा सकता है। अगर रैश हो भी जाए तो शुरुआती स्तर पर सही देखभाल से बच्चे को राहत मिल सकती है।
खुशबू और अल्कोहल वाले वाइप्स से बचें
डायपर बदलते समय बच्चे की त्वचा को साफ करने के लिए तेज खुशबू, अल्कोहल या अन्य संभावित जलन पैदा करने वाले तत्व युक्त वैट वाइप्स का इस्तेमाल न करें। इसके बजाय सादे गुनगुने पानी और मुलायम कॉटन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
त्वचा को अच्छी तरह सुखाएं
सिर्फ सफाई करना ही पर्याप्त नहीं है, डायपर पहनाने से पहले त्वचा को अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है। मुलायम कॉटन के कपड़े या तौलिए से त्वचा को रगड़ने के बजाय हल्के हाथों से थपथपाकर सुखाएं।
डायपर बदलने में देर न करें
गीला या गंदा डायपर लंबे समय तक बच्चे की त्वचा के संपर्क में रहने से जलन और रैश का ख़तरा बढ़ सकता है। इसलिए बच्चे के पेशाब या मल त्यागने के बाद जितनी जल्दी संभव हो, डायपर बदल दें।
कुछ समय डायपर से दें छुट्टी
जब भी संभव हो, बच्चे को कुछ समय बिना डायपर के रखें, ताकि प्रभावित हिस्से में हवा लग सके और त्वचा सूखी रह सके। रैश होने पर यह उपाय विशेष रूप से मददगार हो सकता है। बच्चे को किसी साफ, सूखे तौलिए या चादर पर थोड़ी देर बिना डायपर के लिटाया जा सकता है।
डायपर बहुत टाइट न हो
डायपर का बहुत टाइट होना त्वचा से रगड़ बढ़ा सकता है और नमी को अंदर फंसा सकता है। इसलिए बच्चे के लिए ऐसा डायपर चुनें जो सही फिट हो।


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