बच्चों में बुखार को लेकर माता-पिता का चिंतित होना स्वाभाविक है। तापमान बढ़ते ही कई लोग तुरंत दवा, ठंडे पानी की पट्टी या एंटीबायोटिक देने लगते हैं लेकिन हर बुखार गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता।
बुखार शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की संक्रमण से लड़ने की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है इसलिए केवल थर्मामीटर की रीडिंग देखने के बजाय बच्चे के व्यवहार, सक्रियता और दूसरे लक्षणों पर भी ध्यान देना जरूरी है। आइए, बुखार से जुड़े कुछ आम मिथकों और उनकी सच्चाई को समझें।
मिथक 1: तेज बुखार का मतलब गंभीर बीमारी है
तेज बुखार हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। वायरल संक्रमण के दौरान भी बच्चे का तापमान काफी बढ़ सकता है। बीमारी की गंभीरता समझने के लिए यह देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है कि बच्चा कैसा व्यवहार कर रहा है, कितना सक्रिय है, ठीक से सांस ले पा रहा है या नहीं और पर्याप्त तरल पदार्थ ले रहा है या नहीं।
यदि बुखार कम होने के बाद बच्चा सामान्य रूप से खेलने लगे और पानी या अन्य तरल पदार्थ ले रहा हो, तो यह अपेक्षाकृत राहत की बात हो सकती है।
मिथक 2 : हर बुखार में एंटीबायोटिक जरूरी है
अधिकांश बच्चों में बुखार वायरल संक्रमण के कारण होता है और एंटीबायोटिक वायरस पर असर नहीं करती। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक देने से दस्त, एलर्जी | जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं और आगे चलकर एंटीबायोटिक रैजिस्टेंस का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए बच्चे को एंटीबायोटिक देने से पहले बुखार के संभावित कारण का पता लगाना जरूरी है।
मिथक 3 : तापमान को तुरंत सामान्य करना जरूरी बुखार का उपचार केवल थर्मामीटर का तापमान सामान्य करने के लिए नहीं किया जाता। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चे की परेशानी कम करना और उसे आराम देना है।.
यदि बच्चा आराम से है, पर्याप्त तरल पदार्थ ले रहा है और उसका व्यवहार सामान्य है, तो केवल तापमान के आंकड़े को देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उचित देखभाल महत्वपूर्ण है।
मिथक 4 : ठंडे पानी या बर्फ से बुखार जल्दी उतरता है
बच्चे को बहुत ठंडे पानी से नहलाने या बर्फ लगाने से बुखार जल्दी उतरना जरूरी नहीं है। इससे कंपकंपी हो सकती है और बच्चा अधिक असहज महसूस कर सकता है। उसे मौसम के अनुसार हल्के और आरामदायक कपड़े पहनाएं और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देते रहें।
मिथक 5 : दांत निकलने से तेज बुखार होता है
दांत निकलने के दौरान बच्चे में चिड़चिड़ापन, मसूड़ों में परेशानी या हल्का तापमान बढ़ना संभव है। लेकिन तेज बुखार को केवल दांत निकलने का परिणाम मानना सही नहीं है। ऐसे में संक्रमण सहित दूसरे संभावित कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए।
इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें
यदि बच्चा बहुत सुस्त हो, उसे जगाने में परेशानी हो, सांस लेने में दिक्कत हो, लगातार उल्टी हो रही हो, वह तरल पदार्थ न ले पा रहा हो, पेशाब बहुत कम हो गया हो, गर्दन अकड़ रही हो, दौरा पड़ा हो या शरीर पर असामान्य बैंगनी या खून जैसे दाने दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लें। तीन महीने से कम उम्र के बच्चे का तापमान 38 डिग्री सैल्सियस (100.4 डिग्री फारेनहाईट) या इससे अधिक होने पर भी तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।


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