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| सुकून भरी नींद लाने के प्राकृतिक उपाय: सोने में मदद करने वाले घरेलू नुस्खे |
दिनभर की भागदौड़ और जिम्मेदारियों के बाद बिस्तर पर लेटकर आंखें बंद करना और सुकून "से नींद में चले जाना बेहद सुखद अनुभव है लेकिन उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों के लिए यह सहज नींद मुश्किल होने लगती है।
बिस्तर पर जाते ही दिनभर की चिंताएं यादं आने लगती हैं, अगले दिन के कामों की फिक्र सताने लगती है और घड़ी की सूइयां जैसे बहुत धीमी गति से चलती महसूस होती हैं।
अच्छी नींद किसी विलासिता का नाम नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य की बुनियाद है। पर्याप्त नींद शरीर को आराम देने के साथ याद्दाश्त, एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है।
नींद की दवाएं कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर की सलाह से उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक बेहतर नींद के लिए स्वस्थ आदतें अधिक मददगार होती हैं। आइए जानते हैं कुछ आसान उपाय ।
मन को शांत करें
यदि सोने के समय भी मन विचारों में उलझा रहता है, तो शरीर पूरी तरह आराम नहीं कर पाता। सोने से पहले 5-10 मिनट धीमी गहरी सांस लेने, हल्की स्ट्रैचिंग या ध्यान का अभ्यास करें। अपना ध्यान सांसों पर रखें और आने वाले विचारों को बिना किसी तनाव के गुजरने दें।
योग तनाव कम करने तथा मन और मांसपेशियों को आराम देने में सहायक हो सकता है।
सोने-जागने का समय तय रखें
शरीर एक निश्चित दिनचर्या को पसंद करता है। रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने से शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी बेहतर ढंग से काम करती है।
छुट्टी के दिन भी अपनी सामान्य दिनचर्या में बहुत अधिक बदलाव न करें। धीरे-धीरे शरीर उसी समय नींद के लिए तैयार होने लगता है।
कमरे को ठंडा और आरामदायक रखें
सोने के समय शरीर का तापमान स्वाभाविक रूप से थोड़ा कम होता है। इसलिए बहुत गर्म या घुटन भरा कमरा नींद में बाधा डाल सकता है।
कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन रखें। मौसम के अनुसार हल्के और आरामदायक कपड़े तथा हवादार बिस्तर का इस्तेमाल करें। गर्मी के दिनों में पंखे या एयर कंडिशनर से कमरे का तापमान आरामदायक रखा जा सकता है।
शाम को रोशनी कम करें
तेज रोशनी, खासकर मोबाइल, टी.वी.. और टैबलेट की स्क्रीन, मस्तिष्क को यह संकेत देती है कि अभी दिन का समय है। इससे नींद के लिए जरूरी हार्मोन 'मेलाटोनिन' का स्राव प्रभावित हो सकता है।
सोने से करीब एक घंटे पहले घर की रोशनी थोड़ी मंद कर दें और स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें। इसके बजाय किताब पढ़ना, धीमा संगीत सुनना या परिवार के साथ शांत बातचीत करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
मन का बोझ कागज पर उतारें
कई बार अधूरे काम और चिंताएं बिस्तर तक पहुंच जाती हैं। सोने से पहले अगले दिन के जरूरी कामों की छोटी-सी सूची बना लें। मन में चल रहे विचारों को कागज पर लिखना उन्हें व्यवस्थित करने में मदद करता है। दिन की 3 अच्छी या सुखद बातों को याद करना भी मन में सकारात्मकता और शांति ला सकता है।
दोपहर बाद कैफीन से बचें
शाम की चाय या कॉफी भी रात की नींद को प्रभावित कर सकती है। कॉफी, चाय, कोला, एनर्जी ड्रिंक और चॉकलेट में मौजूद कैफीन कई घंटों तक शरीर में सक्रिय रह सकता है। यदि नींद में परेशानी हो रही है, तो दोपहर के बाद कैफीन का सेवन कम करने का प्रयास करें। रात में कैफीन रहित हर्बल पेय लिया जा सकता है।
लगातार परेशानी हो तो विशेषज्ञ से मिलें
कभी-कभार नींद न आना सामान्य है लेकिन कई सप्ताह तक नींद खराब रहे, दिनभर थकान महसूस हो या दैनिक जीवन प्रभावित होने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। लगातार अनिद्रा के पीछे चिंता, अवसाद, स्लीप "एपनिया, रैस्टलैस लैग्स सिंड्रोम या कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव जैसे कारण हो सकते हैं। सही कारण की पहचान और उचित उपचार से नींद में लंबे समय तक सुधार लाया जा सकता है।



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