क्या आपको लगता है कि लिवर की बीमारी सिर्फ शराब पीने वालों को ही हो सकती है? ऐसा बिल्कुल नहीं है। आज बदलती जीवनशैली, बढ़ता मोटापा, अनियमित खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण फैटी लिवर तेजी से आम होता जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि शुरुआती चरण में इसके कोई स्पष्ट लक्षण भी नजर नहीं आते, इसलिए कई लोगों को इसका पता नियमित जाँच के दौरान ही चलता है लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो
यही समस्या आगे चलकर लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। अच्छी बात यह है कि सही खान-पान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर फैटी लिवर के जोखिम को काफर्को हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं इसके कारण, लक्षण, जांच, बचाव और उपचार से जुड़ी जरूरी बातें।
कारण
फैटी लिवर के प्रमुख कारणों में मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाइपोथायरॉइडिज्म, बढ़ा हुआ + कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स तथा कुछ दवाओं का लंबे समय तक सेवन शामिल है। इनमें अमियोडैरोन, मैथोट्रेक्सेट और कुछ दर्द निवारक दवाएं शामिल हो सकती हैं।
हृदय संबंधी जोखिम फैटी लिवर केवल लिवर से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह व्यापक मैटाबॉलिक सिड्रोम का हिस्सा हो सकता है। फैटी लिवर से पीड़ित कई लोगों में सीधे लिवर फेलियर की तुलना में हृदय संबंधी जटिलताओं, जैसे हार्ट अटैक, का जोखिम अधिक चिंता का विषय होता है।
निदान
फैटी लिवर का पता अक्सर नियमित अल्ट्रासाऊंड या रक्त जांच फैटी लिवर का पता अक्सर के दौरान संयोग से चलता है। अल्ट्रासाऊंड में लिवर में जमा वसा के कारण वह आसपास के ऊतकों की तुलना में अधिक चमकीला दिखाई देता है।
जीवनशैली में बदलाव जरूरी
फैटी लिवर के उपचार में जीवनशैली में बदलाव प्राथमिक और सबसे प्रभावी उपाय है। शरीर के वजन में केवल 2-4 प्रतिशत की कमी भी लिवर में फैट कम करने और बीमारी के आगे बढ़कर फाइब्रोसिस, सिरोसिस या हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (लिवर कैंसर) में बदलने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
व्यायाम कितना करें ?
सप्ताह में कम से कम 135 मिनट पैदल चलना, यानी लगभग 19 मिनट प्रतिदिन, प्रभावी माना गया है। एक संतुलित व्यायाम दिनचर्या में रोजाना एरोबिक एक्सरसाइज, जैसे पैदल चलना, दौड़ना या तैरना के साथ सप्ताह में लगभग तीन दिन रैजिस्टेंस एक्सरसाइज, जैसे वेट ट्रेनिंग और स्क्वैट्स शामिल करना लाभकारी है। इससे मांसपेशियों को बनाए रखने में मदद मिलती है।


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