
सावन की पहली बारिश, मिट्टी की सौंधी खुशबू, पेड़ों पर पड़े झूले, हाथों में सजी मेहंदी और हरे रंग के परिधानों में सजी महिलाएं... भारतीय संस्कृति में तीज का त्योहार कुछ ऐसा ही मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है।
तीज केवल एक व्रत या धार्मिक पर्व नहीं है। यह भारतीय नारी के प्रेम, विश्वास, संकल्प, आत्मबल और भक्ति का उत्सव है। शिव-पार्वती के प्रेम और दांपत्य जीवन की मंगलकामना से जुड़ा यह पर्व सदियों से भारतीय समाज में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।
हर साल सावन और भाद्रपद के दौरान मनाई जाने वाली तीन प्रमुख तीज हैं—हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज। तीनों का समय, पूजा की परंपरा और धार्मिक महत्व अलग-अलग है।
साल 2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त, शनिवार को मनाई जाएगी। यह श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है। (Drik
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तीज क्या है?
तीज हिंदू धर्म में महिलाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसका संबंध विशेष रूप से माता पार्वती और भगवान शिव से माना जाता है। तीज के माध्यम से महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन, पारिवारिक मंगल और अपने जीवन में प्रेम एवं समृद्धि की कामना करती हैं।
हालांकि आम धारणा में तीज को केवल पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला व्रत माना जाता है, लेकिन इसका धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप इससे कहीं व्यापक है। यह पर्व नारी के संकल्प, भक्ति, प्रेम और आत्मबल को भी दर्शाता है।
तीज के अवसर पर महिलाएं पूजा-पाठ के साथ-साथ मेहंदी लगाती हैं, श्रृंगार करती हैं, लोकगीत गाती हैं, झूला झूलती हैं और परिवार तथा सखियों के साथ उत्सव मनाती हैं।
तीज कितने प्रकार की होती है?
भारत में सावन और भाद्रपद के दौरान मनाई जाने वाली तीन प्रमुख तीज हैं—
1.
हरियाली तीज
2.
कजरी तीज
3.
हरतालिका तीज
इन तीनों त्योहारों का अपना अलग धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।
1. हरियाली तीज
2026 कब है?
हरियाली तीज 2026 में 15 अगस्त, शनिवार को मनाई जाएगी। यह श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आती है। (Drik
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सावन में चारों ओर हरियाली छाने के कारण इसे हरियाली तीज कहा जाता है। इस दिन प्रकृति और नारी सौंदर्य का अद्भुत मेल देखने को मिलता है।
महिलाएं इस दिन विशेष रूप से हरे रंग के कपड़े पहनती हैं। हरी चूड़ियां, मेहंदी, झूले और सावन के लोकगीत इस पर्व की पहचान बन चुके हैं।
हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पर्व शिव और पार्वती के पुनर्मिलन तथा सुखी दांपत्य जीवन का प्रतीक है। (Drik
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हरियाली तीज पर क्या किया जाता है?
हरियाली तीज के दिन महिलाएं अपनी परंपरा और पारिवारिक रीति के अनुसार—
·
शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
·
मेहंदी लगाती हैं।
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हरे रंग के वस्त्र और चूड़ियां पहनती हैं।
·
झूला झूलती हैं।
·
तीज के लोकगीत गाती हैं।
·
सखियों और परिवार की महिलाओं के साथ उत्सव मनाती हैं।
·
कई स्थानों पर व्रत भी रखा जाता है।
हरियाली तीज को कई स्थानों पर सिंधारा तीज या छोटी तीज के नाम से भी जाना जाता है। (Drik
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2. कजरी तीज
2026 कब है?
कजरी तीज 2026 में 31 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को आती है। (Drik
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कजरी तीज को कई क्षेत्रों में बड़ी तीज भी कहा जाता है। इस पर्व का संबंध वर्षा ऋतु, लोकपरंपराओं और महिलाओं के सामूहिक उत्सव से है।
कजरी तीज के अवसर पर महिलाएं लोकगीत गाती हैं। ग्रामीण और पारंपरिक क्षेत्रों में इस दिन नीम के पेड़ से जुड़ी पूजा की परंपरा भी देखने को मिलती है।
कजरी गीतों में सावन-भादों की वर्षा, मायके की याद, प्रेम, विरह और वैवाहिक जीवन की भावनाएं खूबसूरती से व्यक्त होती हैं।
यही वजह है कि कजरी तीज केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय लोक-संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
3. हरतालिका तीज
2026 कब है?
हरतालिका तीज 2026 में 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है और सामान्यतः गणेश चतुर्थी के आसपास पड़ती है। (Drik
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हरतालिका तीज का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से माना जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार माता पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं। उन्होंने शिव को पाने के लिए कठिन तप किया।
इसी कथा के कारण हरतालिका तीज को संकल्प, तपस्या और आत्मबल का पर्व माना जाता है।
इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। कई परंपराओं में मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमाएं बनाकर पूजा करने की परंपरा भी बताई गई है। (Drik
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हरियाली तीज और हरतालिका तीज में क्या अंतर है?
अक्सर लोग हरियाली तीज और हरतालिका तीज को एक ही पर्व समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग त्योहार हैं।
हरियाली तीज सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है और वर्षा, हरियाली, शिव-पार्वती की आराधना तथा सामाजिक उत्सव से जुड़ी है।
वहीं हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है और इसका मुख्य धार्मिक आधार माता पार्वती की तपस्या और शिव को पति रूप में पाने का संकल्प है।
इसलिए दोनों तीजों की तारीख और धार्मिक कथा अलग है।
तीज का शिव-पार्वती से क्या संबंध है?
तीज पर्व का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पक्ष भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा है।
पौराणिक परंपरा में माता पार्वती को दृढ़ संकल्प, तपस्या और भक्ति की शक्ति के रूप में देखा जाता है। भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए उनके तप और समर्पण की कथा महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है।
इसी कारण तीज के अवसर पर शिव-पार्वती की पूजा की जाती है और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है।
लेकिन इस कथा का अर्थ केवल विवाह तक सीमित नहीं है। इसके भीतर एक गहरा संदेश छिपा है—जब व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार, धैर्यवान और दृढ़ रहता है, तो कठिन रास्ते भी आसान होने लगते हैं।
तीज में मेहंदी और हरे रंग का क्या महत्व है?
तीज आते ही बाजारों में हरे रंग की चूड़ियां, साड़ियां, लहंगे और मेहंदी की मांग बढ़ जाती है।
हरा रंग प्रकृति, हरियाली और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। सावन के मौसम में जब धरती हरियाली से भर जाती है, तब महिलाओं का हरे रंग के वस्त्र पहनना इस प्राकृतिक सौंदर्य के साथ एक सुंदर सांस्कृतिक जुड़ाव बनाता है।
मेहंदी भी तीज की खूबसूरत परंपराओं में शामिल है। हाथों पर बनी मेहंदी केवल श्रृंगार नहीं बल्कि उत्सव और खुशी की अभिव्यक्ति बन जाती है।

तीज पर झूला झूलने की परंपरा
सावन और झूले का संबंध भारतीय लोकजीवन में बहुत पुराना है।
पेड़ों की डालियों पर झूले पड़ते हैं और महिलाएं तथा युवतियां सावन के गीत गाते हुए झूला झूलती हैं। कई लोकगीतों में मायके की याद, सखियों का साथ और वर्षा ऋतु का मनोहारी वर्णन मिलता है।
आज शहरों में पेड़ों पर झूले लगाना पहले की तुलना में कम हो गया है, लेकिन कई जगहों पर तीज समारोहों में झूला और सावन गीतों की परंपरा आज भी जीवित है।
तीज और 'सिंधारा' की परंपरा
हरियाली तीज के अवसर पर मायके से विवाहित बेटी के लिए उपहार भेजने की परंपरा कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है। इसे सिंधारा कहा जाता है।
सिंधारा में कपड़े, चूड़ियां, मेहंदी, मिठाइयां और विशेष रूप से घेवर जैसी चीजें भेजी जाती हैं। (Drik
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इस परंपरा के पीछे केवल उपहार देने का भाव नहीं है। इसके पीछे बेटी के प्रति माता-पिता का प्रेम, उसकी कुशलता की चिंता और उसके वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामना छिपी होती है।
शादी के बाद जब बेटी दूसरे घर चली जाती है, तब तीज जैसे पर्व उसके मायके और बचपन की यादों को फिर से जीवंत कर देते हैं।
तीज केवल व्रत नहीं, भावनाओं का त्योहार है
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में त्योहारों का महत्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रह गया है।
तीज महिलाओं को अपनी सखियों, बहनों और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर देती है। वे अपने अनुभव साझा करती हैं, गीत गाती हैं, हंसती हैं और पुरानी यादों को ताजा करती हैं।
इस दृष्टि से तीज महिलाओं के लिए सामाजिक जुड़ाव और भावनात्मक अभिव्यक्ति का भी अवसर है।
कभी-कभी जीवन की जिम्मेदारियों के बीच महिलाएं अपनी खुशियों के लिए समय नहीं निकाल पातीं। ऐसे में तीज का सामूहिक उत्सव उन्हें कुछ समय अपने लिए जीने का अवसर देता है।
नारी शक्ति का प्रतीक है तीज
तीज की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसके केंद्र में नारी शक्ति की एक ऐसी छवि दिखाई देती है, जो प्रेम करने के साथ-साथ अपने संकल्प पर अडिग भी रहती है।
विशेष रूप से हरतालिका तीज की कथा माता पार्वती के दृढ़ निश्चय और तपस्या को सामने रखती है।
यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है कि नारी कोमल हो सकती है, लेकिन कमजोर नहीं।
उसकी शक्ति केवल उसके त्याग में नहीं बल्कि उसके निर्णय, आत्मविश्वास और संकल्प में भी होती है।
आधुनिक समय में तीज का महत्व
आज की आधुनिक जीवनशैली में त्योहार मनाने का तरीका बदल गया है। पहले जहां तीज का उत्सव मुख्य रूप से परिवार और समुदाय के बीच होता था, वहीं अब सोशल मीडिया भी इसका हिस्सा बन चुका है।
महिलाएं तीज की तस्वीरें, मेहंदी डिजाइन, तीज स्पेशल रेसिपी और शुभकामना संदेश सोशल मीडिया पर साझा करती हैं।
लेकिन आधुनिकता के बीच इस पर्व की मूल भावना को बनाए रखना जरूरी है।
तीज को केवल नए कपड़े, गहने, मेकअप और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित करने के बजाय इसके पीछे छिपे संदेश को भी समझना चाहिए—प्रेम, आत्मसंयम, विश्वास, परिवार, प्रकृति और आत्मबल।
तीज हमें क्या सिखाती है?
तीज का पर्व हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश देता है।
पहला संदेश—संकल्प की शक्ति।
माता पार्वती की कथा बताती है कि दृढ़ संकल्प व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
दूसरा संदेश—प्रेम में सम्मान।
शिव-पार्वती की परंपरा भारतीय संस्कृति में दांपत्य जीवन को साझेदारी और सम्मान के भाव से जोड़ती है।
तीसरा संदेश—परिवार का महत्व।
सिंधारा की परंपरा बताती है कि विवाह के बाद भी बेटी का मायके से भावनात्मक रिश्ता बना रहता है।
चौथा संदेश—प्रकृति से जुड़ाव।
हरियाली तीज सावन की हरियाली और वर्षा ऋतु की सुंदरता के साथ मनुष्य के रिश्ते को दर्शाती है।
पांचवां संदेश—सामूहिक खुशी।
गीत, झूले और सामूहिक पूजा लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं।
तीज और महिलाओं का आत्मचिंतन
क्या तीज केवल इसलिए मनाई जाए कि यह वर्षों से चली आ रही परंपरा है?
शायद नहीं।
किसी भी परंपरा की वास्तविक सुंदरता तब सामने आती है, जब हम उसके पीछे छिपे अर्थ को समझते हैं।
हरतालिका तीज की कथा को यदि आत्मचिंतन के रूप में देखा जाए तो यह हमें अपने जीवन के लक्ष्य, इच्छाओं और संकल्पों पर विचार करने का अवसर देती है।
आज की महिला अपने परिवार के साथ-साथ शिक्षा, करियर, व्यवसाय और समाज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे में तीज उसके लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपनी शक्ति और पहचान को महसूस करने का अवसर भी बन सकती है।
क्या तीज सिर्फ विवाहित महिलाओं के लिए है?
नहीं। अलग-अलग क्षेत्रों में तीज मनाने की परंपराएं अलग हैं।
कई स्थानों पर अविवाहित युवतियां भी तीज का व्रत और पूजा करती हैं तथा अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं। विवाहित महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन और परिवार के मंगल की कामना से पर्व मनाती हैं।
इसलिए तीज को केवल नवविवाहित महिलाओं का त्योहार कहना सही नहीं होगा।
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में तीज की धूम
राजस्थान में तीज का उत्सव विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहां पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, झूले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से तीज की सुंदर झलक देखने को मिलती है।
हरियाणा और पंजाब में भी सावन के दौरान महिलाओं के बीच तीज का उत्साह देखने को मिलता है। मेहंदी, चूड़ियां, झूले, लोकगीत और सामूहिक कार्यक्रम इस पर्व को खास बनाते हैं।
ब्रज और उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में भी तीज की अपनी अलग लोकपरंपराएं हैं।
यही विविधता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी खूबसूरती है—एक ही त्योहार अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रंग और रूप लेकर सामने आता है।
तीज पर बनने वाले खास पकवान
तीज के अवसर पर कई घरों में पारंपरिक मिठाइयां और पकवान बनाए जाते हैं।
इनमें घेवर का विशेष महत्व है। इसके अलावा गुजिया, मालपुआ, खीर और अन्य क्षेत्रीय पकवान भी बनाए जाते हैं।
मायके से बेटी को भेजे जाने वाले सिंधारे में भी मिठाइयों और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने की परंपरा है।
हरियाली तीज 2026 की खास बात
साल 2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त, शनिवार को पड़ रही है। पंचांग के अनुसार यह श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया है। (Drik
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इस बार हरियाली तीज और स्वतंत्रता दिवस भी एक ही दिन पड़ रहे हैं। इसलिए 15 अगस्त 2026 भारतीय कैलेंडर में एक विशेष दिन रहेगा—एक तरफ देशभक्ति का पर्व और दूसरी ओर सावन की हरियाली, शिव-पार्वती भक्ति तथा नारी शक्ति का उत्सव।
तीज पर महिलाओं के लिए एक जरूरी संदेश
व्रत और धार्मिक आस्था अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी भी व्रत को अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।
विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बीमार लोगों या नियमित दवाएं लेने वालों को कठोर उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
भक्ति का अर्थ अपने शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और सकारात्मक भाव से ईश्वर को याद करना भी है।
तीज : परंपरा से आधुनिकता तक
समय बदलता है, जीवनशैली बदलती है और त्योहार मनाने के तरीके भी बदलते हैं। लेकिन कुछ भावनाएं कभी पुरानी नहीं होतीं।
मायके से बेटी के लिए भेजा गया सिंधारा आज भी प्रेम का संदेश देता है। हाथों की मेहंदी आज भी खुशी का प्रतीक है। सावन का झूला आज भी बचपन की याद दिलाता है। शिव-पार्वती की पूजा आज भी आस्था और दांपत्य जीवन की मंगलकामना से जुड़ी है।
इसीलिए तीज आज भी प्रासंगिक है।
यह पर्व हमें याद दिलाता है कि परंपरा तभी जीवित रहती है जब नई पीढ़ी उसके बाहरी रूप के साथ-साथ उसके भीतर छिपे भाव को भी समझे।
निष्कर्ष : तीज है प्रेम, भक्ति और आत्मबल का उत्सव
तीज को केवल एक व्रत के रूप में देखना इस पर्व की व्यापकता को सीमित कर देना होगा।
यह प्रकृति की सुंदरता का उत्सव है।
यह शिव और शक्ति की आराधना है।
यह मायके और बेटी के रिश्ते की मिठास है।
यह सखियों के साथ हंसी-खुशी का अवसर है।
यह लोकगीतों और भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा है।
और सबसे बढ़कर, यह नारी के आत्मबल, संकल्प और विश्वास का उत्सव है।
हरियाली तीज से लेकर कजरी तीज और हरतालिका तीज तक, तीज की प्रत्येक परंपरा भारतीय जीवन में रिश्तों, प्रकृति, भक्ति और नारी शक्ति को एक साथ जोड़ती है।
इसलिए इस तीज पर केवल श्रृंगार और उत्सव ही नहीं, बल्कि अपने भीतर के आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा को भी जगाएं।
तीज का यही संदेश है—प्रेम में शक्ति है, भक्ति में विश्वास है और संकल्प में सफलता की राह छिपी है।
तीज से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
हरियाली तीज 2026 कब है?
हरियाली तीज 2026 में 15
अगस्त, शनिवार को मनाई जाएगी। यह श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है। (Drik
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हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है?
हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित पर्व है। इसे सुखी दांपत्य जीवन, प्रेम और पारिवारिक मंगल की कामना से मनाया जाता है।
तीज कितने प्रकार की होती है?
सावन और भाद्रपद में मनाई जाने वाली तीन प्रमुख तीज हैं—हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज।
कजरी तीज 2026 में कब है?
कजरी तीज 2026 में 31
अगस्त, सोमवार को है। (Drik
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हरतालिका तीज 2026 कब है?
हरतालिका तीज 2026 में 14
सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। (Drik
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क्या अविवाहित लड़कियां तीज का व्रत रख सकती हैं?
कई क्षेत्रों की परंपराओं में अविवाहित लड़कियां भी तीज का व्रत रखती हैं और अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं। हालांकि स्थानीय परंपराओं के अनुसार रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं।
हरियाली तीज पर हरे रंग के कपड़े क्यों पहने जाते हैं?
हरा रंग हरियाली, प्रकृति और नई ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है। सावन में चारों ओर हरियाली होने के कारण तीज पर हरे रंग के वस्त्र और चूड़ियां पहनने की परंपरा लोकप्रिय है।
सिंधारा क्या होता है?
सिंधारा हरियाली तीज के अवसर पर मायके से बेटी को भेजे जाने वाले उपहारों की परंपरा है। इसमें कपड़े, चूड़ियां, मेहंदी, मिठाई और घेवर आदि शामिल हो सकते हैं। (Drik
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क्या तीज सिर्फ महिलाओं का त्योहार है?
तीज की प्रमुख धार्मिक और लोकपरंपराएं महिलाओं से जुड़ी हैं, लेकिन इसका सांस्कृतिक संदेश परिवार, प्रकृति, प्रेम और सामाजिक एकता से व्यापक रूप से जुड़ा है।


Thankyou