भारत की आन, बान और शान – तिरंगा
भारत की
आन, बान और
शान केवल एक
वाक्य नहीं, बल्कि
हर भारतीय के
गर्व, सम्मान और
देशभक्ति की पहचान
है। हमारा राष्ट्रीय
ध्वज तिरंगा भारत
की स्वतंत्रता, एकता,
अखंडता और लोकतांत्रिक
मूल्यों का प्रतीक
है। जब भी
तिरंगा शान से
लहराता है, करोड़ों
भारतीयों का सिर
गर्व से ऊँचा
हो जाता है।
हर वर्ष 22 जुलाई को भारत में राष्ट्रीय ध्वज दिवस (National Flag Adoption Day) मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1947 में संविधान सभा ने तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया था।
राष्ट्रीय ध्वज
दिवस क्यों मनाया
जाता है?
22 जुलाई
1947 भारतीय इतिहास का
एक स्वर्णिम दिन
है। इसी दिन
संविधान सभा की
बैठक में भारत
के राष्ट्रीय ध्वज
को औपचारिक रूप
से स्वीकार किया
गया। स्वतंत्रता प्राप्ति
से कुछ दिन
पहले यह निर्णय
लिया गया कि
केसरिया, सफेद और
हरे रंग वाले
ध्वज को अशोक
चक्र के साथ
स्वतंत्र भारत का
राष्ट्रीय ध्वज बनाया
जाएगा।
यह दिन हमें
उन लाखों स्वतंत्रता
सेनानियों के त्याग,
संघर्ष और बलिदान
की याद दिलाता
है जिन्होंने देश
की आजादी के
लिए अपना सर्वस्व
न्योछावर कर दिया।
तिरंगे का
इतिहास
भारत के वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण का श्रेय महान स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया को जाता है।
1921
– तिरंगे की
पहली रूपरेखा
1921 में
पिंगली वेंकैया ने
एक ध्वज तैयार
किया जिसमें लाल
और हरे रंग
की दो पट्टियाँ
थीं। जब उन्होंने
इसे महात्मा गांधी
को दिखाया, तो
गांधी जी ने
इसमें सफेद रंग
तथा चरखा जोड़ने
का सुझाव दिया।
- लाल – साहस और
प्रमुख समुदायों का
प्रतीक
- हरा – समृद्धि और
कृषि
- सफेद – शांति एवं
अन्य सभी धर्मों
का प्रतिनिधित्व
- चरखा – स्वदेशी और
आत्मनिर्भरता
1923
– नागपुर ध्वज
सत्याग्रह
1923 में
नागपुर में हुए
शांतिपूर्ण आंदोलन के
दौरान हजारों लोगों
ने इस ध्वज
को हाथों में
लेकर ब्रिटिश शासन
के विरुद्ध विरोध
प्रदर्शन किया। यह
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन
का एक महत्वपूर्ण
अध्याय बना।
22
जुलाई 1947 – राष्ट्रीय ध्वज
की स्वीकृति
स्वतंत्रता से ठीक पहले संविधान सभा की बैठक में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रीय ध्वज का प्रस्ताव रखा। विचार-विमर्श के बाद चरखे की जगह अशोक चक्र को अपनाया गया और इसी ध्वज को भारत का राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया गया।
तिरंगे की बनावट
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज
एक आयताकार आकार
का होता है।
- लंबाई और चौड़ाई
का अनुपात – 3:2
- तीन समान क्षैतिज
पट्टियाँ
- मध्य में गहरे
नीले रंग का
24 तीलियों वाला अशोक चक्र
तिरंगे के तीन रंगों का महत्व
1.
केसरिया रंग
ऊपरी पट्टी का
केसरिया रंग दर्शाता
है—
- साहस
- वीरता
- त्याग
- राष्ट्रभक्ति
- निस्वार्थ सेवा
यह हमें राष्ट्रहित
को सर्वोपरि रखने
की प्रेरणा देता
है।
2.
सफेद रंग
बीच की सफेद
पट्टी का अर्थ
है—
- शांति
- सत्य
- ईमानदारी
- पारदर्शिता
- सद्भाव
यह समाज में
प्रेम और भाईचारे
का संदेश देती
है।
3.
हरा रंग
नीचे की हरी
पट्टी प्रतीक है—
- कृषि
- हरियाली
- समृद्धि
- पर्यावरण
- विकास
यह भारत की
उर्वर भूमि और
प्राकृतिक संपन्नता को
दर्शाती है।
अशोक चक्र का महत्व
तिरंगे के मध्य
में बना गहरे
नीले रंग का
अशोक चक्र सम्राट
अशोक के सारनाथ
स्थित सिंह स्तंभ
से लिया गया
है।
इसमें 24 तीलियाँ होती
हैं।
ये 24 तीलियाँ प्रतीक
हैं—
- निरंतर प्रगति
- न्याय
- धर्म
- कर्तव्य
- अनुशासन
- सत्य
- मानवता
यह संदेश देती
हैं कि जीवन
में कभी रुकना
नहीं चाहिए और
सदैव कर्मपथ पर
आगे बढ़ते रहना
चाहिए।
2002 में मिला तिरंगा फहराने का अधिकार
वर्ष 2002 में भारतीय
ध्वज संहिता (Flag Code of India) में महत्वपूर्ण बदलाव
किए गए।
इसके बाद प्रत्येक
भारतीय नागरिक को
सम्मानपूर्वक किसी भी
दिन—
- घर
- दुकान
- कार्यालय
- फैक्टरी
में राष्ट्रीय ध्वज
फहराने का अधिकार
प्राप्त हुआ।
राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े महत्वपूर्ण नियम
राष्ट्रीय ध्वज का
सम्मान प्रत्येक भारतीय
का कर्तव्य है।
कुछ प्रमुख नियम—
- ध्वज हमेशा सम्मानपूर्वक
फहराया जाए।
- फटा या गंदा
झंडा प्रयोग न
करें।
- कागज के झंडों
को जमीन पर
न फेंकें।
- उपयोग के बाद
उनका सम्मानपूर्वक निपटान
करें।
- ध्वज का उपयोग
वस्त्र, सजावट या
पैरों के नीचे
बिछाने के लिए
न करें।
- ध्वज की मर्यादा
बनाए रखना प्रत्येक
नागरिक का दायित्व
है।
तिरंगा और खादी
भारतीय कानून के
अनुसार राष्ट्रीय ध्वज
परंपरागत रूप से
खादी से बनाया
जाना चाहिए।
खादी केवल एक
कपड़ा नहीं बल्कि
महात्मा गांधी के
स्वदेशी आंदोलन, आत्मनिर्भरता
और भारतीय स्वाभिमान
का प्रतीक भी
है।
भारत की आन, बान और शान क्यों है तिरंगा?
तिरंगा केवल तीन
रंगों का कपड़ा
नहीं है।
यह—
- देश की आजादी
का प्रतीक है।
- लाखों शहीदों के
बलिदान की निशानी
है।
- भारत की एकता
और अखंडता का
संदेश देता है।
- करोड़ों भारतीयों की
पहचान है।
- राष्ट्र के गौरव
और सम्मान का
प्रतीक है।
इसीलिए हर भारतीय
गर्व से कहता
है—
"तिरंगा हमारी
पहचान है, तिरंगा
हमारा सम्मान है,
तिरंगा ही
भारत की आन,
बान और शान
है।"
निष्कर्ष
राष्ट्रीय ध्वज दिवस
केवल एक ऐतिहासिक
अवसर नहीं बल्कि
राष्ट्रीय गर्व का
उत्सव है। भारत
की आन, बान
और शान तिरंगा
हमें यह याद
दिलाता है कि
स्वतंत्रता हमें अनगिनत
बलिदानों के बाद
मिली है। इसलिए
प्रत्येक नागरिक का
कर्तव्य है कि
वह तिरंगे का
सम्मान करे, उसकी
मर्यादा बनाए रखे
और आने वाली
पीढ़ियों को भी
इसके महत्व से
परिचित कराए।
जब भी तिरंगा
आसमान में लहराता
है, वह हर
भारतीय के हृदय
में देशभक्ति, सम्मान
और एकता की
भावना को और
भी प्रबल कर
देता है।
FAQ
1.
राष्ट्रीय ध्वज
दिवस कब मनाया
जाता है?
हर वर्ष 22 जुलाई को।
2.
तिरंगे को
किसने डिजाइन किया
था?
स्वतंत्रता सेनानी पिंगली
वेंकैया ने।
3.
अशोक चक्र में
कितनी तीलियाँ होती
हैं?
24 तीलियाँ।
4.
तिरंगे का
अनुपात क्या
है?
3:2 (लंबाई : चौड़ाई)
5.
भारत का राष्ट्रीय
ध्वज क्या दर्शाता
है?
भारत की आन,
बान, शान, एकता,
अखंडता, स्वतंत्रता
और लोकतांत्रिक मूल्यों
का प्रतीक है।
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