
भूमध्य रेखा के पास कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां हर रोज शाम को ठीक 4 बजे अचानक घने बादल छा जाते हैं और झमाझम बारिश होने लगती है। इसे '4 ओ क्लॉक रेन' कहा जाता है। यह कोई जादुई घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रकृति का एक बहुत ही सटीक और गहरा विज्ञान काम करता है।
भूमध्य रेखा हमारी पृथ्वी के ठीक बीचों-बीच से गुजरने वाली एक काल्पनिक रेखा है, जो धरती को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में बांटती है। यहां साल भर सूरज की किरणें बिल्कुल सीधी पड़ती हैं। इसके चलते यहां का तापमान हमेशा बहुत अधिक रहता है और भीषण गर्मी पड़ती है।
अत्यधिक गर्मी और आस-पास मौजूद महासागरों व घने जंगलों के कारण यहां हवा में नमी का स्तर हमेशा चरम पर रहता है, जो इस रोजाना होने वाली बारिश की पहली और सबसे बड़ी वजह बनता है। तीखी धूप और गर्मी की वजह से इस क्षेत्र में मौजूद नदियों, समुद्रों और पेड़ों का पानी बहुत तेजी से भाप में बदलने लगता है।
विज्ञान की भाषा में इसे वाष्पीकरण की प्रक्रिया कहते हैं। सुबह से ही सूरज की तपिश के कारण पानी लगातार भाप बनकर हवा में ऊपर उठने लगता है। दोपहर होते-होते जमीन के पास की गर्म और नम हवा बहुत हल्की होकर काफी ऊंचाई तक पहुंचने लगती है और वहां का तापमान कम होने की वजह से यह ठंडी होने लगती है। ठंडी होने के बाद यह भाप दोबारा पानी की छोटी-छोटी बूंदों में बदल जाती है। आसमान में गहरे, घने और काले बादलों का निर्माण होने लगता है। दोपहर के बाद करीब 3 से 5 बजे के बीच और खासकर ठीक 4 बजे के आस-पास, शुरू होती है मूसलाधार बारिश, जिसे ' 4 ओ क्लॉक रेन' कहा जाता है। यह बहुत तेज होती है और इसके साथ ही बादलों की तेज गड़गड़ाहट और बिजली चमकना भी आम बात है। करीब एक-दो घंटे तक झमाझम बरसने के बाद शाम ढलते ही मौसम फिर से बिल्कुल साफ हो जाता है।
यह बारिश केवल भूमध्य रेखा के आस-पास के क्षेत्रों, जैसे अफ्रीका के कांगो बेसिन, दक्षिण अमेरिका के अमेजन वर्षावनों और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ द्वीपों में ही नियमित रूप से देखी जाती है। इन जगहों पर रहने वाले लोगों के लिए यह बारिश इतनी आम हो चुकी है कि वे इसके हिसाब से ही अपनी शाम की योजनाएं बनाते हैं।
source https://youtube.com/shorts/2IzN2jG7gK8?feature=share


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